कभी कोई उसके कंधे पर सिर रखकर पूछे भी— “तू ठीक है?”
फिर भी बेइंतहा तुझे चाहने की बेबसी मेरी।
शहर ज़ालिमों का है साहब, जरा संभल कर चलना,
क्योंकि ये कफन बार बार हटाया नहीं जाता…!
बेवकूफ़ समझती है वो मुझे, मैं बदनसीब नहीं — बस प्यार का ही मारा हूँ।
अदा कातिल, निगाह कातिल, जुबां कातिल बयां कातिल,
लोग तसल्लियां तो देते हैं पर साथ नहीं..!!
हुस्न पर क्या इतराना जिसकी औकात ही बिस्तर तक है…!
ये न सही करने देती है न ही कुछ गलत करने देती है।
आज जो तुम्हारा है… कल किसी और का इंतज़ार हो सकता है।
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फिर Sad Shayari in Hindi सोचा मैंने उन्हें तड़पाके दर्द मुझको ही होगा,
सच कहूँ तो अब अकेले रहने में ही सुकून है,
और कब आएगा वो दिन… बस उसी दिन को याद करते रहते हैं।
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